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मैं अब भी तेरे पीछे अपना, वक़्त ज़ाया करता हूँ....


मैं अब भी तेरे पीछे अपना,
वक़्त ज़ाया करता हूँ,
जाने क्या कर गई ऐसा तू की,
चाह के भी मैं संभल न पाया,
बदल गए हालात मेरे पर,
मैं खुद को कभी बदल न पाया,
कोशिशें ज़ारी रखी,
कहीं और दिल लगाने की पर,
हाथ थामे किसी और का,
२ कदम भी मैं चल न पाया,
सुकून की तलाश में खुद को,
अब भी सताया करता हूँ,
मैं अब भी तेरे पीछे अपना,
वक़्त ज़ाया करता हूँ,
मेरी ज़िंदगी में कोई याद नहीं,
जिसमे न जिक्र तुम्हारा हो,
कोई लम्हा कोई पल नहीं,
जिसमे न फिक्र तुम्हारा हो,
जारी हर पल यादों का दौर,
हर वक़्त हमारे दिल में है,
बेशक सिमटी है यादों में तू,
पर कमी तेरी महफ़िल में है,
तू थी कभी अब मैं खुद हीं,
खुद को सताया करता हूँ,
वक़्त के हाथों मैं खुद को,
हर पल आज़माया करता हूँ,
मैं अब भी तेरे पीछे अपना,
वक़्त ज़ाया करता हूँ,
यादों में रखता हूँ हर पल,
तेरे साथ गुजरे दिनों को,
व्यस्त भी रखता हूँ हर पल,
दिल दिमाग धड़कन तीनो को,
फिर भी मन के किसी कोने में,
तेरी याद आ जाया करती है,
लाख सम्भालो दिल को पर,
धड़कन खो जाया करती है,
तब खुद से खुद के गम अपने,
शब्दों में बताया करता हूँ,
मैं अब भी तेरे पीछे अपना,
वक़्त ज़ाया करता हूँ..pankaj

मुश्किलों को हराते है, चलो मुस्कुराते हैं....


मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
उदासियों में रखा है क्या,
आओ थोड़ी खुशियाँ बांटते हैं,,
वर्षों पुराने ज़ख्मों को,
खुशियों से मात देते हैं,
बस तारीफें दुनिया से ले के,
हर तानों को ठुकराते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
कल की उम्मीद पलकों में लिए,
इस सोच से आगे बढ़ते हैं,
लेते हैं थोड़ा उनसे हौसला,
जो नित्य पहाड़ चढ़ते हैं,
कुछ हौसला समंदर से भी,
जो पर्वत को भी घिसते हैं,
कुछ हौसलें नदियों से भी,
जो झरनों में से रिसते हैं,
ले कर सब उधर आज सब से,
कदम हम आगे बढ़ाते हैं,
अपनी हँसी के बीच में अपने,
हालात को आज छुपाते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
कोई छीन नहीं सकता मुझसे मेरा,
जो मेरा नहीं वो खो के रहेगा,
गीता में भी साफ़ लिखा है,
जो होना है वो हो के रहेगा,
फिर क्यों कल की चिंता में,
आज को अपने खो देना,
जिन पलकों ने ख्वाब देखे इतने,
क्यों इनको है भिगो देना,
आओ सब कुछ को भुला के फिर से,
खुद को थोड़ा आज़माते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं....pankaj

ए "ज़िन्दगी" तू कौन है....


ए "ज़िन्दगी" तू कौन है,
सपनो की एक दुनिया है,
या अपनों का एक बंधन है,
खुशियों का अनोखा मेल है,
या रिश्तों का अदभुद खेल है,
रश्मों की एक डोर है,
या घुटन का एक शोर है,
जीने की कोई आज़ादी या,
मन का छिपा कोई चोर है,
बचपन की एक मिठास है,
या जीवन भड़ की प्यास है,
किस्मत की अनोखी हार है,
या अपनों का एक प्यार है,
मंज़िल की एक ढ़ाल है या,
दोस्ती की एक मिशाल है,
प्यार का एक ज़माना है,
या खुश रहने का बहाना है,
पलकों का बिछडा सपना है या,
दूर हुआ कोई अपना है,
खुशियों का कोई आफ़ताब है,
या बीती यादों का किताब है,
लाखों उलझन है जीवन के,
और जवाब छुपे हैं कण कण में,
हर रोज की यही कहानी है,
फिर आज क्यों ये परेशान है,
पूछने पर अब क्यों मौन है,
तू हीं बता दे अब खुद को,
ए "ज़िंदगी" तू कौन है!

हारा भी जरूर हूँ वक़्त से, पर अभी ज़िंदा हूँ मैं....


आज हार मान ली है अपनी,
कल फिर लौट के आऊंगा,
जो चुन ली है मंज़िल अपनी,
उसे अंजाम तक पहुँचाऊँगा,
रोक सके तो रोक ले,
राह कि हर बाधा मुझे,
अब तो जान दे कर भी खुद से,
निभाना है हर वादा मुझे,
कुछ गलत फैसलों पे अपने,
भले हीं शर्मिंदा हूँ मैं,
हारा भी जरूर हूँ वक़्त से,
पर अभी ज़िंदा हूँ मैं,
देखा है अक्सर मैंने,
पंछियों को दूर उड़ते गगन में,
आसमा छूने कि चाह लिए,
देखी है ज़िद्द एक उनके लगन में,
कोशिशों से जो हारा न कभी,
आसमां का वही परिंदा हूँ मैं,
हारा भी जरूर हूँ वक़्त से,
पर अभी ज़िंदा हूँ मैं..

मत पूछो की किस तरह से, कट रही है ज़िंदगी, यारों उस दौर से गुजर रहा हूँ, जो की गुजरता हीं नहीं..

mat pucho ki kis tarah se kat rahi hai zindgi....
मत पूछो की किस तरह से,
कट रही है ज़िंदगी,
यारों उस दौर से गुजर रहा हूँ,
जो की गुजरता हीं नहीं,
कुछ पा लेने की चाह में,
हर दिन हीं कुछ खोता हूँ,
सह लेता हूँ कभी दर्द बड़े तो,
कभी छुपके पलकें भिगोता हूँ,
सहमा सा होता हूँ कभी,
हार जाने के दर से मैं,
बेशक जीता हूँ आज में हीं,
पर कल को भूल न पाता हूँ,
मानो वक़्त यूँ खफा है जो,
चाहकर भी ठहरता हीं नहीं,
मत पूछो की किस तरह से,
कट रही है ज़िंदगी,
यारों उस दौर से गुजर रहा हूँ,
जो की गुजरता हीं नहीं,
हर सुबह की नयी रौशनी सी,
कोई नयी चाह रोज दिल में जगती,
चलने की सोचूं आगे तो,
हर राह हीं तब आसान है लगती,
कोई पल जो दिल को भा जाता,
कोई मंज़िल नज़रों को जँच जाती,
तभी कुछ ऐसा हो जाता की,
हर ख़ुशी है फींकी पड़ जाती,
लड़खड़ाने को मजबूर हों मानो,
चाह कर भी संभालता हीं नहीं,
मत पूछो की किस तरह से,
कट रही है ज़िंदगी,
यारों उस दौर से गुजर रहा हूँ,
जो की गुजरता हीं नहीं..

हारना नहीं मेरे बेटे तुम, पापा ने इतना हीं सिखाया है....

haarna nahi mere bete tum papa ne itna hin sikhaya hai..
हारना नहीं मेरे बेटे तुम,
पापा ने इतना हीं सिखाया है,
हार कभी न मानना,
देख क मुश्किल राहों की,
तनहा हो के भी गम ना करना,
सूने होते बाँहों की,
बस कोशिशें जारी रखना,
यूँ हार के ना पीछे हटना,
चाहे भूल जाना सब कुछ तुम,
पर बात यही एक याद रखना,
छीन नहीं सकता तुझसे कोई,
जो तू नसीब में ले के आया है,
हारना नहीं मेरे बेटे तुम,
पापा ने इतना हीं सिखाया है,
तोलना मत यहाँ खुद को किसी से,
खुद को औरों से अलग हीं रखना,
रुक जाए कदम पर थमे ना हौसलें,
क़दमों का तो बस काम है थकना,
सपने वही जो खुद कर सको पूरा,
किसी की आस पे ना रुक जाना,
टूटने ना देना रिश्तों को,
बेशक चाहे तुम झुक जाना,
कुछ जायेगा नहीं ज़िंदगी के साथ,
फिर गुरूर भला किस बात का,
पूरी ज़िंदगी साथ रहेगा बस,
मेहनत से जो भी कमाया है,
हारना नहीं मेरे बेटे तुम,
पापा ने इतना हीं सिखाया है!

छोटी सी तो ज़िन्दगी है यार, क्या तेरा रूठना जरूरी है....

choti si to zindagi hai yaar kya tera roothna jaroori hai....
छोटी सी तो ज़िन्दगी है यार,
क्या तेरा रूठना जरूरी है,
जानती है तू भी इतना तो,
कि कितना तुजपे मरता हूँ,
क्या कोई चाहेगा तुझे,
जितना तुझे प्यार करता हूँ,
इक यही ख्वाइश है मेरी,
जो वर्षों से कहनी थी तुझसे,
जान भी ले अब मुझको तू,
और दिल लगा ले तू मुझसे,
समा जा उन धड़कनों में जहाँ,
मेहफ़ूज़ तू पूरी पूरी है,
छोटी सी तो ज़िन्दगी है यार,
क्या तेरा रूठना जरूरी है,
कितनी बार कहा है तुमसे,
मेरो बेवजह की बातों में,
हर बार न मतलब ढूंढा कर,
हर पल है दिल में चाह तेरी,
इस चाहत को न परखा कर,
आ कर मिटा दे फासलें,
सदियों से जो हम मे दूरी है,
छोटी सी तो ज़िन्दगी है यार,
क्या तेरा रूठना जरूरी है!

तुमसे रूठ कर भी, तुमसे हीं प्यार करते हैं, हमे तो ठीक से, नाराज़ होना भी नहीं आता....

tumse rooth kar bhi tumse hin pyar karte hain,hume to thik se naraz hona bhi nahi aata..
तुमसे रूठ कर भी,
तुमसे हीं प्यार करते हैं,
हमे तो ठीक से,
नाराज़ होना भी नहीं आता,
इश्क़ की ये गुमनाम राहें,
रास नहीं थी हमे कभी,
बस देखते थे छुप के तुम्हे,
न सोचा था चाहेंगे कभी,
अब चाह लिया है तुमको तो,
निभाएंगे वफ़ा भी तुमसे हीं,
मनाएंगे बेशक हम तुम्हे,
तो होंगे खफा कभी तुमसे हीं,
अब सच कहूँ तो तुम्हारे सिवा,
हमे जहाँ में कुछ नहीं भाता,
तुमसे रूठ कर भी,
तुमसे हीं प्यार करते हैं,
हमे तो ठीक से,
नाराज़ होना भी नहीं आता,
एक उमंग में जीता हूँ हर पल,
तेरे साथ का हीं ये असर है,
हाथ जो थामे तू चले फिर,
हर दर्द हीं बेअसर है,
यूँ लगता दुनिया हो गई पराई,
एक बस तुझसे हीं मेरा नाता,
तुमसे रूठ कर भी,
तुमसे हीं प्यार करते हैं,
हमे तो ठीक से,
नाराज़ होना भी नहीं आता!

मैं आज भी इस उम्र में, बचपन अपना जी लेता हूँ....


main aaj bhi is umar me bachpan apna jee leta hun....
कभी स्कूल की गलियों में,
नयी यादें गढ़ लेता हूँ,
तो कभी दीवार पर लिखे,
वो सुविचार पढ़ लेता हूँ,
कभी बच्चों सी ज़िद्द पाले,
घर वालों से लड़ लेता हूँ,
तो कभी पूल पर रुक कर के,
रेलगाड़ियों के डिब्बे गीन लेता हूँ,
मैं आज भी इस उम्र में,
बचपन अपना जी लेता हूँ,
कभी भींगने से डरता हूँ तो,
कभी बारीश में भीग लेता हूँ,
कभी माँ मुझे डांटती है तो,
चुप हो के सुन लेता हूँ,
कभी कभी मस्ती में यूँही,
ऊँचे पेड़ों पे चढ़ लेता हूँ,
मैं आज भी इस उम्र में,
बचपन अपना जी लेता हूँ,
कभी घर की छत पे चढ़,
पतंगबाजी कर लेता हूँ,
तो कभी गली के बच्चों संग,
क्रिकेट हीं खेल लेता हूँ,
कभी बारिश के पानी में,
कागज की नाव दौड़ा लेता हूँ,
तो कभी झील के पानी में,
कोई कंकड़ हीं फेंक लेता हूँ,
मैं आज भी इस उम्र में,
बचपन अपना जी लेता हूँ!

हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर....

haqiqat ki duniya sapno ka safar....
बना कर के इंसान मुझे,
खुदा ने एक एहसान किया,
सिमटा रहुँ खुद में ही,
इसलिए आँखों में ख्वाब दिया,
हर वक़्त आँखों में घूमते,
बचपन के ख्वाब वो अनोखे से,
नाज़ुक थे इतने की टूट जाते थे,
हवा के बस एक झोंके से,
वक़्त लगा समझने में पर,
समय रहते ये जान गया,
ज़िंदगी की हक़ीक़त को,
अब अच्छे से पहचान गया,
पर समझाए कैसे ये बात इसे,
की है ये कैसा भंवर,
हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर,
माँ की ममता के नीचे,
बीती बचपन की हर रात,
तारीफ करे हर कोई जिससे,
सिखाई माँ ने हर वो बात,
सिख कर इन बातों को ही,
हर पल मैं आगे बढ़ता रहा,
करके छाती चौड़ी अपनी,
ये बात सबसे कहता रहा,
दुआएँ मेरी माँ की साथ है हर वक़्त,
तभी तो बना मैं इतना निडर,
हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर,
पापा के कन्धों पे बैठ,
हर सुबह सैर पर जाते थे,
क्या अच्छा और क्या है बुरा,
पापा ये फ़र्क़ बताते थे,
इन बातों ने हीं सोच बदली,
और बना दिया मुझे बेफिक्र,
हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर,
भाई बहन से ज़िद्द करना,
सब बहाना था झगड़ने का
तब का वो तरीका था शायद,
आपस में प्यार जताने का,
एक दूजे से हीं उलझे उलझे,
बीत गए बचपन के दिन,
काट रहा हूँ वक़्त मैं,
हर पल में अब उनके बिन,
एहसास इन रिश्तों के साथ हैं मेरे,
चाहे कैसी भी हो ज़िंदगी की डगर,
हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर,
अकेली लगी दुनिया जब भी,
दिल ने कई नए दोस्त बनाये,
मिला साथ कुछ ऐसे उनका,
की हर मोड़ पे वो काम आये,
दिल आज भी ये करता है,
लौटा के वक़्त वापस लाने को,
जब साथ थे हम सभी,
वो वक़्त फिर से बिताने को,
क्यों चले गए बिछड़ के हमसे,
न जाने आज वो किधर,
हक़ीक़त की दुनिया सपनो का सफर!

रास्ते कभी खत्म नहीं होते, लोग अक्सर हिम्मत हार जाते हैं....


raaste kabhi khatam nahi hote,
log aksar himmat haar jaate hain.
रास्ते कभी खत्म नहीं होते,
लोग अक्सर हिम्मत हार जाते हैं,
मुसीबतों को जब ये कदम,
हँस के यूँही ठुकराती है,
तब छोटी छोटी कोशिशों से हीं,
जीत उभर कर आती है,
यूँही नहीं हो जाते पूरे,
सपने रातों रात में,
हर कामयाबी के पीछे,
कई रात खाली जाती है,
दुनिया उन्हें अपनाती है,
जो अपने सारे ग़मों को,
हँस के स्वीकार जाते हैं,
रास्ते कभी खत्म नहीं होते,
लोग अक्सर हिम्मत हार जाते हैं,
ज़िंदगी का अनूठा नियम है ये,
सुख दुःख तो आता जाता है,
असल में वही एक वीर है जो,
खुद को यहाँ जीत पाता है,
समझौते जिसको पसंद नहीं,
मुश्किल से न जो घबराता है,
सपने तो सभी सजाते हैं पर,
असल में मंज़िल वही पाता है,
वो नहीं जो डर के दुनिया से,
ख्वाइश अपनी मार जाते हैं,
रास्ते कभी खत्म नहीं होते,
लोग अक्सर हिम्मत हार जाते हैं!

हमने फ्यूचर की बस के इंतज़ार में, बचपन की आइस्क्रीम को पिघलते देखा है....

humne future ki bus ke intzaar me,bachpan ki ice-cream ko pighalte dekha hai....
हर शाम की लाली में खो कर,
सूरज को ढलते देखा है,
झूठे सपनो की चाह में हमने,
रातों को गुजरते देखा है,
चाँद है कोशों दूर हमसे पर,
नदी के ठहरे जल में अक्सर,
चांदनी को मचलते देखा है,
उम्र का तकाज़ा हमसे न जताओ साहब,
इतनी सी उम्र में हीं हमने,
जीने का हर रूप देखा है,
हमने फ्यूचर की बस के इंतज़ार में,
बचपन की आइस्क्रीम को पिघलते देखा है,
जीने की खुशियों के बीच,
किसी की याद को खलते देखा है,
लबों पे हँसी रख के अक्सर,
हर दिल को जलते देखा है,
टूटती निगाहों में भी हमने,
नए ख्वाब मचलते देखा है,
हमसे न पूछो ज़िंदगी की,
सफर के रास्तों के बारे में साहब,
जरुरत पड़ने पर हमने,
अपनों को बदलते देखा है,
अपने हीं यादों में अपना,
खोया हुआ बचपन देखा है,
माँ की ममता में हमने,
भगवन के रूप को देखा है,
खुद के सीने में हमने,
मंज़िल की भूख को देखा है,
हमसे न सुनाओ,
मुसीबतें इन राहों की,
हमने बिन पंखों के भी,
लहरों को उड़ते देखा है!

पुछे घर की लाडली, बाबुल क्यूँ तेरी प्रीत पराई....

pooche ghar ki laadli babul kyun teri preet parai....
पुछे घर की लाडली,
बाबुल क्यूँ तेरी प्रीत पराई,
ले कर जन्म बेटी का,
इस घर में जब मैं आई थी,
खुश थे लोग इतने की,
हर चेहरे को हँसता पाई थी,
हर बात सीखा मैंने जहाँ,
फिर पराया क्यूँ था मेरा हर रिश्ता,
जब घर तेरा छोड़ना ही था,
फिर मैं क्यों तेरे घर आई,
पुछे घर की लाडली,
बाबुल क्यूँ तेरी प्रीत पराई,
कर के कन्यादान मेरा,
रो रहे थे मेरे साथ तुम भी,
दुनिया के रीती रिवाज़ों में,
मजबूर से थे उस पल तुम भी,
दे कर हाथों में मेरा हाथ,
जोड़ दिया रिश्ता गैरों के साथ,
हो गए पराये इक पल में अपने,
रब ने कैसी ये रीत बनाई,
पुछे घर की लाडली,
बाबुल क्यूँ तेरी प्रीत पराई!

दिल की ख्वाईश है इतनी सी,खुले आँख तो तेरा साथ हो, हो बंद तो तेरा ख्वाब हो....

dil ki khwaish hai itni si....
दिल की ख्वाईश है इतनी सी,
खुले आँख तो तेरा साथ हो,
हो बंद तो तेरा ख्वाब हो,
तू अगर मुझको मिल जाए,
ख्वाईश मैं सारी ठुकरा दूँ,
ठुकरा दूँ अपनी हर चाहत,
रातों की नींद भी लुटा दूँ,
खुशियों का दामन थाम लूँ,
गम से मैं पल्ला झाड़ लूँ,
तू जीत के अगर जो खुश हो तो,
हँस के हर बाज़ी हार जाऊँ,
बदले में है बस चाह यही,
मेरे नाम से हीं खिले तेरे,
सजे मेहँदी के हाथ हों,
दिल की ख्वाइश है इतनी सी,
खुले आँख तो तेरा साथ हो,
हो बंद तो तेरा ख्वाब हो!

अब तुम भी कुछ कहो ना....

ab tum bhi kuch kaho na....
एक आदत अजीब हो गई है,
तेरी यादों में हीं जीने की.
दुनिया से छिपा के अपने,
ग़मों को हँस के सीने की,
खोये खोये से होते हैं,
अक्सर मेरे रात और दिन,
भाता नहीं कुछ भी हमे,
हर ख़ुशी है सूनी मेरी तुम बिन,
तुम्हे देख लिया सब मिट गया,
फिर क्या भूख क्या नींद चैन,
तम्हारे होने से हीं सब कुछ है,
बिन तेरे सूने मेरे दिन रैन,
अब पास हो कर भी अनजान से,
यूँ तुम चुप रहो न,
सुन लिया न हाल मेरा,
अब तुम भी कुछ कहो ना!

खूबसूरत सी है दुनिया ये फिर, ज़िन्दगी क्यों इतनी अजीब है....

khubsurat si hai duniya ye fir......
खूबसूरत सी है दुनिया ये फिर,
ज़िन्दगी क्यों इतनी अजीब है,
ख्वाब देखने भी हमे,
खुद हीं ये सिखाती है,
दिल को आहट भी नहीं होती और,
इक पल में सब छीन लेती है,
पलकों के पीछे छिपे सपने,
अधूरे हीं रह जाते हैं,
किसे मिलनी है खुशियां कितनी,
हर एक का अपना नसीब है,
खूबसूरत सी है दुनिया ये फिर,
ज़िन्दगी क्यों इतनी अजीब है,
हर किसी को अपनी चिंता है,
पूरे करने कई सपने हैं,
दूसरों की कोई सोचता नहीं,
चाहे वो उसके अपने हैं,
भाग दौड़ पड़ी है हर जगह,
सब खुद में हीं उलझे हैं,
पर वक़्त हीं तय करता ये,
कौन किसके कितने करीब है,
खूबसूरत सी है दुनिया ये फिर,
ज़िन्दगी क्यों इतनी अजीब है!

ज़िदगी के आखिरी पलों में, ऐ खुदा बता देना कुछ पहले....

zindagi ke aakhiri palon me ay khuda bata dena kuch pehle....
ज़िदगी के आखिरी पलों में,
ऐ खुदा बता देना कुछ पहले,
जब साँसें टूटने को हों,
जब दिन बचे हो गिन के चार,
बाँट लूंगा मैं दर्द किसी के,
पा लुँगा थोड़ा और मैं प्यार,
आखिरी पल में तमाम उन लोगों का,
शुक्रिया कहना है जो,
बुरे वक़्त में मेरे साथ रहे,
उन अपनों को अलविदा है कहना,
जो हर ख़ुशी में मेरे पास रहे,
गम बांटे हँस कर मेरे,
हर वक़्त बने मेरे खास रहे,
सीखा वफ़ा के रंग जिनसे,
सीखा जिनसे मैंने हर व्यवहार,
है कहना उनसे इतना ही,
खुश रहना अब चलता हूँ यार,
ज़िदगी के आखिरी पलों में,
ऐ खुदा बता देना कुछ पहले,
जब साँसें टूटने को हों,
जब दिन बचे हों गिन के चार,
बाँट लूंगा मैं दर्द किसी के,
पा लुँगा थोड़ा और मैं प्यार!

दुनिया के रैन बसेरे में, जाने कितने दिन और रहना है....

duniya ke rain basere me jaane kitne din aur rehna hai..
दुनिया के रैन बसेरे में,
जाने कितने दिन और रहना है,
अगले पल में क्या होगा,
कुछ भी यहाँ है तय नहीं,
खुद को अगर जो जीत लिया,
तो उससे बड़ी कोई विजय नहीं,
रूठो न यहाँ पे किसी से तुम,
न किसी को खुद से रूठने दो,
संभाले रखो दिल को अपने,
उम्मीदें यूँ न टूटने दो,
अभी ख्वाब बहुत सजाने हैं,
जीने की चाहत रखनी हैं,
बांटनी हैं खुशियां जाने कितनी,
जाने कितने पीर सहने हैं,
दुनिया के रैन बसेरे में,
जाने कितने दिन और रहना है!

खुदा तू आज अपनी कलम से....

khuda tu aaj apni kalam se....
चैन नहीं ज़िंदगी में अब,
टूट रहे हर ख्वाब मेरे,
ख़ुशी भड़ी मेरी शामों को,
जैसे है बुरी कोई साया घेरे,
बदल दे अब किस्मत की चल,
तू अपने रहमो करम से,
थोड़ी खुशियाँ लिख दे नसीब में मेरे,
खुदा तू आज अपनी कलम से,
अजीब से ख्याल आते हैं मन में,
तनहा मैं जब भी होता हूँ,
बीती यादों में उलझ कर,
दिल ही दिल में रोता हूँ,
डर लगता है कहीं टूट न जाऊं,
मन के मेरे इस वहम से,
थोड़ी खुशियाँ लिख दे नसीब में मेरे,
खुदा तू आज अपनी कलम से,
मांग रहा हूँ उतना ही,
जितनी मेरी औकात है,
सुन ले अगर जो तू मेरी,
खुशियों की फिर हर रात है,
दर्द मिटा दे तू मेरे,
प्यार के अपने मरहम से,
थोड़ी खुशियाँ लिख दे नसीब में मेरे,
खुदा तू आज अपनी कलम से!

आ जाओ थोड़ी मैं हँसी चून दूँ, बीती यादों के पिटारे से....

aa jaao thodi main hansi chun dun beeti yaadon ke peetare se...
आ जाओ थोड़ी मैं हँसी चून दूँ,
बीती यादों के पिटारे से,
इतनी खुशियाँ देने पे भी,
गम के कभी तुम पास हो जाओ,
शोभा नहीं देता ये मुझको,
तुम मेरे होते उदास हो जाओ,
चेहरे की तेरे रंगत को,
हँसा के थोड़ा सँवार दूँ,
क्यों बैठी हो उदासी में,
पास आओ तुम्हे प्यार दूँ,
रौशनी भड़ दूँ ज़िंदगी में थोड़ी,
ले कर आसमाँ के सितारों से,
आ जाओ थोड़ी मैं हँसी चून दूँ,
बीती यादों के पिटारे से,
आओ तुम्हे मैं राज़ बताऊँ,
हर पल मैं हँसता हूँ कैसे,
रख पता हूँ एक सा ही,
हर वक़्त हँसी चेहरे पे कैसे,
सीखा दूँ तुम्हे गम को भूलना,
आँखों की नमी के पीछे,
की रास्ता तुम्हे खुशियों का दिखा दूँ,
ख्वाबों के नज़ारे से,
आ जाओ थोड़ी मैं हँसी चून दूँ,
बीती यादों के पिटारे से!

अब यादों में ही जीना तुम, मुलाक़ात ये आखरी है....

ab yaadon me hi jeena tum,mulaqat ye aakhri hai....
अब यादों में ही जीना तुम,
मुलाक़ात ये आखरी है,
अब ख्वाबों में ही ढूँढना,
बीतये जो दिन साथ में,
न हँस पता हूँ खुद में अब,
न हँसी तेरी मेरे हाथ में,
ये फैसला है दोनों का,
खुशियाँ भले हीं बिखड़ी है,
अब यादों में ही जीना तुम,
मुलाक़ात ये आखरी है,
निकले जो भी होठों से तेरे,
हँस के तेरी हर बात वो मानी,
आज तक थी तुम हक़ीक़त मेरी,
कल होगी तुम किस्सा पुरानी,
अब क्या पता कहीं मिल ही जाएँ,
हो जगह कोई वो अनजानी,
तो कल बस इतना कह देना,
ये सूरत है जानी पहचानी,
खत्म हो रहा रिश्ता पर,
ज़िंदगी ख्वाबों से निखड़ी है,
अब यादों में ही जीना तुम,
मुलाक़ात ये आखरी है!

ख्वाबों से पलकों तक आती, रौशनी वो धीमी सी....

khwabon se palkon tak aati raushni wo dhimi si....
ख्वाबों से पलकों तक आती,
रौशनी वो धीमी सी,
कर देती बेताब दिल को,
यादें वो सहमी सहमी सी,
राहें तेरी देख देख,
कई सावन यूँही बीत गए,
बेबस और लाचार हो के,
यादों के मौसम रीत गए,
फिर भी दिल में एक तू ही है,
होठों पे इक बस नाम तेरा,
दिल धड़कन संग मेरी तड़पन,
सुबह तेरी मेरा शाम तेरा,
टूक टूक देखे एक तुझे बस,
आँखों में अजब बेशर्मी सी,
ख्वाबों से पलकों तक आती,
रौशनी वो धीमी सी,
कर देती बेताब दिल को,
यादें वो सहमी सहमी सी!

तुम्हारे पास तो चलो तुम हो, मेरे पास तो मैं भी नहीं....

tumhare paas to chalo tum ho mere paas to main bhi nahi....
तुम्हारे पास तो चलो तुम हो,
मेरे पास तो मैं भी नहीं,
घुमा शहर हर गाँव गाँव,
पर दूजा न तुझसे पा सके,
व्यस्त भी हो गए आज में,
पर तुझको न भूला सकें,
हर बार कहा तुझसे ये की,
मेरी ख़ुशी है तुझमे ही,
पर मेरी भी चाहत थी कुछ,
ये न तुझे हम बता सके,
दर्द रहा बरक़रार दिल में,
सोचते रहे तुमसे कहें की नहीं,
तुम्हारे पास तो चलो तुम हो,
मेरे पास तो मैं भी नहीं,
कभी हँस दिया यूँही कभी,
कभी ख़ुशी में तेरी खुश हो लिए,
नाराज़ हो लिए तुझसे कभी तो,
कभी संग में तेरे जी लिए,
समझाया कभी तुझे कुछ तो,
कभी समझने की भी कोशिश की,
दिल ने कहा बस इतना ही,
जब ख्वाबों ने रंजिश की,
कब तक जियेंगे हम ऐसे,
तारीख कोई क्यूँ तय नहीं,
तुम्हारे पास तो चलो तुम हो,
मेरे पास तो मैं भी नहीं!

अगर ज़िंदगी खाली खाली है, इक बार प्यार कर लो....

agar zindagi khali khali hai ik baar pyar kar lo....
अगर ज़िंदगी खाली खाली है,
इक बार प्यार कर लो,
ज़िद्द का कोई सवाल नहीं,
दिल से निकली ये बातें हैं,
वक़्त का अलग ये मोड़ है,
नए प्यार की शुरुआतें है,
ख्वाब लिए पलकों में ये,
जागती है हर पल में,
सोने भी ना देती अब ये,
नादान सी लगती रातें हैं,
अगर सूने हैं दिन तेरे भी,
संग मेरे थोड़ा संवर लो,
अगर ज़िंदगी खाली खाली है,
इक बार प्यार कर लो!

सच कहुँ तुम जो आये तो, जीने का नया बहाना मिला.....

sach kahun tum jo aaye to jeene ka naya bahana mila....
सच कहुँ तुम जो आये तो,
जीने का नया बहाना मिला,
बिखड़ा सा रहता था मन,
कुछ ख्वाबों के टूटने के बाद,
सहमा सा रहता था दिल,
कर के हर बार उसको याद,
फिर यूँ अचानक तुम मिल गए,
यूँ लगा दिल में शांत पड़े,
अरमानो के फूल खिल गए,
लम्हों को नयी यादें मिली,
दिल को नया ठिकाना मिला,
सच कहुँ तुम जो आये तो,
जीने का नया बहाना मिला,
रखा न तुम्हे अँधेरे में,
हर बात तुम्हे बस बता दी,
दिल की जो भी हसरतें थीं,
यूँही अचानक जता दी,
फिर साथ तुम्हारा मिला मुझे,
पर दूरियों के एहसास में,
देखा तुझे चोर नज़रों से,
रहे जब भी तुम पास में,
चाहत नयी मिली मुझको पर,
वफ़ा का रंग पुराना मिला,
सच कहुँ तुम जो आये तो,
जीने का नया बहाना मिला!

दोनों यूँही अपने सफर में गुम, तुझसे दूर मैं मुझसे दूर तुम.......

dono yunhi apne safar me goom......
दोनों यूँही अपने सफर में गुम,
तुझसे दूर मैं मुझसे दूर तुम,
ख्वाब न क्यूँ अब आते तेरे,
पूछा ये अपनी नींदों से,
ढूंढा तुझको जहाँ में बहुत,
तेरा पता भी पूछा परिंदो से,
कोशिशें भी की बहुत,
तेरे बारे में जान लेने की,
फिर समझाया खुद को ये भी,
तुझे गैर मान लेने की,
तब कहीं जा कर दिल ये,
बस थोड़ा सा संभला है,
अब पूछता जो हाल तेरा तो,
कह देता मुझे क्या मालूम,
दोनों यूँही अपने सफर में गुम,
तुझसे दूर मैं मुझसे दूर तुम,
व्यस्त तो मैं भी हूँ लेकिन,
इतना भी नहीं की तुझे भुला दूँ,
सहारा है तेरी यादों का,
इतना दम नहीं की उन्हें मिटा दूँ,
जिक्र करता हूँ आज भी सब से,
तू क्या जाने तेरी कितनी,
कहते हैं सब भूल गई होगी,
तुझे कहाँ मेरी कदर थी इतनी,
पर दिल अब भी स्वीकारे न,
तू व्यस्त है अपने आज में इतनी,
कुर्बान कर दी ज़िन्दगी तुझपे,
और तू बनी फिरती मासूम,
दोनों यूँही अपने सफर में गुम,
तुझसे दूर मैं मुझसे दूर तुम!

तेरे होठों से मेरा नाम सुने, सच में यार बहुत दिन हो गए....

tere hothon se mera naam sune,sach me yaar bahot din ho gaye..
तेरे होठों से मेरा नाम सुने,
सच में यार बहुत दिन हो गए,
सुनता हु तेरी ही सदा,
मेरी रूह की रूठी आंहों में,
यादें दस्तक देती है,
सपनो के हर चौराहों पे,
बेशक गम है तुझे खोने का,
पर इतना भी नहीं की रोता ही रहुँ,
सपनों की चाहत अब भी है,
पर इतना भी नहीं की सोता ही रहुँ,
बस आ जाती है यादें कभी,
फिर कहता हु खुद से ही,
की अपने खली पल में तुम्हे,
पुकारे कितने दिन हो गए,
तेरे होठों से मेरा नाम सुने,
सच में यार बहुत दिन हो गए,
चाहत नहीं थी बीते कभी,
दिन कोई मेरे तुम बिन,
पर ज़िद्द ने तेरी बदल दिया,
सीखा ही दिया जीना तुम बिन,
मान लिया ये फर्क था तेरे,
और मेरे तक़्दीरों में,
तभी तो जी रहा हु मैं,
पुराने उन्ही तश्वीरों में,
की खुली आँखों से देखे तुझे,
न जाने कितने दिन हो गए,
तेरे होठों से मेरा नाम सुने,
सच में यार बहुत दिन हो गए!

जब कहती हो की मेरी हो, एक सुकून मिलता है सुन के...

जब कहती हो की मेरी हो,
एक सुकून मिलता है सुन के,
तेरी चाहत में रहता दिल ये,
तेरे ख्वाबों में ही सोता है,
तुम हो हर पल करीब मेरे,
एहसास ये जब भी होता है,
बज उठती है दिल में शहनाई,
दिल याद नए संजोता है,
हदों में अपनी रह के हर बार,
खुश रहता है खुद में ही,
बस साथ तुम्हारे जीने के,
ख्वाब ये पलकों में बुन के,
जब कहती हो की मेरी हो,
एक सुकून मिलता है सुन के,
हर गम में हर ख़ुशी में मेरे,
संग होने का वादा है,
थाम के तुझको हर डगर में,
संग चलने का इरादा है,
तुझ बिन ज़िंदगी सूनी लगती,
हर ख़ुशी मेरी जैसे आधा है,
खामोशियों को तोड़ कभी,
कह दे अगर कोई बाधा है,
सजा दूंगा कल को तेरे,
रंग वफ़ा के जहाँ से चुन के,
जब कहती हो की मेरी हो,
एक सुकून मिलता है सुन के!

कल फिर तुमसे मुहब्बत होगी, कल फिर से कुछ गीले होंगे....

kal fir tumse muhabbat hogi..
कल फिर तुमसे मुहब्बत होगी,
कल फिर से कुछ गीले होंगे,
ख्वाबों  का वो कारवां होगा,
फिर से वही सिलसिले होंगे,
तू दूर हो गई बेशक पर,
बदला न मेरा इरादा है,
फिर दिल मेरा कैसे भड़े जब,
सात जन्मों का तुमसे वादा है,
अगले जन्म में भी यूँही,
राहें तकूँगा मैं तेरी,
चल इस जन्म में ना सही,
अगली दफा तू होगी मेरी,
फूल ये वफाओं के जहां में,
कहाँ ऐसे कभी खिले होंगे,
कल फिर तुमसे मुहब्बत होगी,
कल फिर से कुछ गीले होंगे,
ख्वाबों का वो कारवां होगा,
फिर से वही सिलसिले होंगे,
तू दूरियों में बेशक रह,
पर दिल में तू ही रहेगी,
मैं हारने वाला नहीं,
चाहे तू कुछ भी कहेगी,
समझाएगी तू तुम बिन जीने,
या संभलने को कहेगी,
चाहे लाख कोशिश करेगी तू,
पर दिल में तू ही रहेगी,
मैं राहें तेरी देखूंगा,
आखिरी सांस के टूटने तक,
शाम के ढलने से ले के,
सुबहों की लाली फूटने तक,
याद रखेगा जहाँ हमें,
कहाँ ऐसे दिल मिले होंगे,
कल फिर तुमसे मुहब्बत होगी,
कल फिर से कुछ गीले होंगे,'
ख्वाबों का वो कारवां होगा,
फिर से वही सिलसिले होंगे!

हँसते मुस्कुराते से हम और, लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी........

haste muskurate se hum aur ladkhadati si ye zindgi..
मेरे छोटे से सपने और,
उन्हें चिढ़ाती ये ज़िंदगी,
हँसते मुस्कुराते से हम और,
लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी,
ख्वाइशें वो आज भी,
दिल की वो  छोटी बड़ी मस्ती,
बारिश का वो पानी आज भी,
तैरती उसमे कागज की कश्ती,
यादें पुरानी बचपन की,
सोच कर मुस्कुराती ज़िंदगी,
हँसते मुस्कुराते से हम और,
लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी,
समझाना वो पापा का हमे,
मम्मी का वो डांटना,
उदास होने पर मेरे,
पास आ कर गम मेरे बांटना,
सोच दिन बचपन के यही,
इतराती सी ये ज़िंदगी,
हँसते मुस्कुराते से हम और,
लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी,
बचपन का वो प्यार अधूरा,
वादे वो सात जन्मों के,
झूठे वफ़ा के किस्से वो,
संग में जीने मरने के,
सोच के वो बचकानी हरकत,
शर्माती सी ये ज़िंदगी,
हँसते मुस्कुराते से हम और,
लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी,
बेशक हारे कई बाज़ी पर,
न आई कमी हौसले में,
पर दिल से जब सोचने लगे,
उलझ से गए हर फैसले में,
संभलते से ये कदम मेरे,
भटकाती सी ये ज़िंदगी,
हँसते मुस्कुराते से हम और,
लड़खड़ाती सी ये ज़िंदगी!

भले तुझसे कुछ न चाहा है, पर सिर्फ तुझे ही चाहा है......

bhale tujhse kuch na chaha hai par sirf tujhe hi chaha hai...
भले तुझसे कुछ न चाहा है,
पर सिर्फ तुझे ही चाहा है,
दिल से दिल बातें की हमने,
बिन जाने लबों का इज़हार क्या है,
बस तुझपे ही रुकी है नज़र,
जब से जाना की प्यार क्या है,
नींदें मेरी बेशक हैं पर,
ख्वाबों में एक बस तेरी चाहत,
तुझसे हीं लबों की बेचैनी,
तुझसे हीं धड़कन को राहत,
बताया तो नहीं कभी हमने,
न दिखने दिया है चेहरे पर,
भूल के हालातों को अपने,
तुझे हर पल में सराहा है,
भले तुझसे कुछ न चाहा है,
पर सिर्फ तुझे ही चाहा है,
सोचते हैं मेरा क्या वजूद होता,
मिलता जो न मैं तुझसे अगर,
चाहा है दिल ही दिल में,
बेशक लब खामोश रहें पर,
जब भी झुकी हैं नज़रें,
सजदे में रब के आगे,
भूल कर सब कुछ हमने,
बस एक तुझे हीं माँगा है,
भले तुझसे कुछ न चाहा है,
पर सिर्फ तुझे ही चाहा है!

रिश्ता यही होगा तुमसे, हालात चाहे कैसे भी हों.....

rista yahi hoga tumse,halat chahe kaise bhi ho.....
रिश्ता यही होगा तुमसे,
हालात चाहे कैसे भी हों,
एक अजीब सी चाहत है तुझसे,
जो शब्दों में न ढल पाती,
रिश्ता कुछ ऐसा है तुझसे,
जिसके बिन न धड़कन चल पाती,
तू खुश हो तो मैं भी हँस दूँ,
अगर तू उदास तो मैं भी चुप,
हर बात तेरी दिल को भाती,
जैसे भाती सर्दी की धूप,
बस यही प्यार बनाये रखना,
जज़्बात चाहे कैसे भी हों,
रिश्ता यही होगा तुमसे,
हालात चाहे कैसे भी हों,
दिल बाग़ बाग़ हो जाता जब,
परवाह तू मेरी करती है,
बिलकुल अपना सा लगता है,
जब यूँही तू मुझसे झगड़ती है,
पर कोशिशें सारी मेरी,
इक पल में फींकी लगती है,
जब कभी तू टूट कर,
मेरे पास आ कर रोती है,
दुआ है तू खुशियों में रहे,
चाहे मुझसे दूरियों में रहे,
कदर दिल में हर बार रहेगी,
मुलाक़ात हो चाहे ना भी हो,
रिश्ता यही होगा तुमसे,
हालात चाहे कैसे भी हों!

तुझको क्या लगता दिल मेरे, क्या गम एक तुझी को है......

tujhko kya lagta dil mere,kya gum ek tujhi ko hai...
तुझको क्या लगता दिल मेरे,
क्या गम एक तुझी को है,
भीड़ देख दुनिया की तू,
यहाँ पे कितने चेहरे हैं,
कहीं आग नफरत की है तो,
कहीं रंग वफ़ा के सुनहरे हैं,
कोई टूटा है सपनो से तो,
कोई रूठा है यहाँ अपनों से,
पूछ अगर तो हो मालूम,
हर दिल में ज़ख़्म गहरे हैं,
हैरान क्यूँ है दुनिया से तू,
पलकें इतनी बुझी क्यूँ है,
तुझको क्या लगता दिल मेरे,
क्या गम एक तुझी को है,
तू कहता है खुश उन्हें,
जो हसते तुझको दीखते हैं,
अब तुझको क्या मालूम है वो,
गम दिल में अपने रखते हैं,
जानता है हर बात को तू,
समझता है हालातों को,
फिर क्यूँ खामोश है रहता तू,
तोड़ दिल के जज़्बातों को,
सोच ज़रा तू उदास है क्यूँ,
ज़िन्दगी इतनी उलझी क्यूँ है,
तुझको क्या लगता दिल मेरे,
क्या गम एक तुझी को है!

अब कहुँ क्या तुझसे हाल-ए-दिल, बस ऐसा पहले कभी न हुआ......

aisa pehle kabhi na hua.....
अब कहुँ क्या तुझसे हाल-ए-दिल,
बस ऐसा पहले कभी न हुआ,
धड़कनों में एक बेचैनी है,
पलकों में अलग एक हया है,
साज़िश है ख्वाबों की ये,
हर एहसास हीं जैसे नया है,
कहाँ किसी की बातों ने अब तक,
दिल को मेरे ऐसे था छुआ,
अब कहुँ क्या तुझसे हाल-ए-दिल,
बस ऐसा पहले कभी न हुआ,
उलझनों ने जैसे मिल गई मुक्ति,
सँवरने लगे तेरे करीब आ के,
भूलने लगे अपने ग़मों को,
एक बस तुझको पा के,
पा के तुझको पूरे हो गए,
कहाँ कोई बाकी रही दुआ,
अब कहुँ क्या तुझसे हाल-ए-दिल,
बस ऐसा पहले कभी न हुआ!

हम भारत के वासी हैं........

hum bharat ke vasi hain....
जहाँ दिलों में जीत की,
दिखती हर पल आँधी है,
जहाँ रिश्तों ने खुद में ही,
एक गाँठ ऐसी बाँधी है,
सुकून है जहाँ की मिट्टी में,
यादों में महात्मा गाँधी है,
हम उसी देश के वासी है,
जहाँ अनजाने लोगों को भी,
हम भाई कह के बुलाते हैं,
जहाँ नीम की शीतल छाव में,
देवताओं को अब भी झूलते हैं,
जहाँ बच्चों को लोरियों में हम,
ज्ञान की बात बताते हैं,
और जहाँ बहन की रक्षा में,
भाई अब भी प्राण गवाते हैं,
हम उसी देश के वासी है,
जिस देश में पेड़ के नीचे बैठ,
बुद्धा ने पूरा ज्ञान पाया,
जहाँ सीता माँ की खोज में,
हनुमान ने भूला ध्यान पाया,
जहाँ पे कृष्ण की कृपा से,
द्रोपदी ने खोया मान पाया,
और जहाँ देश की रक्षा में,
वीरों ने हँस के प्राण गवाया,
हम उसी देश के वासी है,
जिस देश में नदियों से भी,
लोग रिश्ते जोड़ा करते हैं,
और जहाँ पे सूनी रातों में हम,
चाँद से बातें करते हैं,
हम उसी देश के वासी है,
जिस देश के लोगों ने हँस के,
दुश्मन से प्यार जताया है,
लाख गीले हों दिल में पर,
मिल कर ख़ुशी दुहराया है,
हम वो नहीं जो लांघ शरहदें,
घुसते रहें दूजे मुल्कों में,
हमने तो पहली कोशिश में,
मंगल पर पैर जमाया है,
हम उसी देश के वासी है,
जहाँ मौसमों को देख लगता,
कितना ये मधुर अभिलाषी है,
हर बार गर्व होता कह के,
की हम भारत के वासी हैं!

तेरी मुस्कान कहती धीरे से, की तुम्हे भी मुझसे प्यार है......

teri muskan kehti dheere se,ki tumhe bhi mujhse pyar hai...
तेरी मुस्कान कहती धीरे से,
की तुम्हे भी मुझसे प्यार है,
जब देखा हुआ तेरी पलकों का,
कोई ख्वाब अधूरा होता है,
दूरियाँ बढ़ जाए मुझसे,
कोई पल बुरा जो होता है,
तू लड़ती है तब कह के ये,
तुम प्यार न मुझसे करते हो,
तभी तो मेरी मेहंदी का,
रंग लाल न पूरा होता है,
आँखों की नमी कहती तब ये,
न समझ लेना तुम गलत मुझे,
इस गुस्से में है छिपा मेरा,
तुमसे हर पल इज़हार है,
तेरे लब कहते हैं इशारे में,
की तुम्हे भी मुझसे प्यार है,
दुनिया लगती जब खफा मुझे,
तुम तो न मुझसे तंग हो न,
तन्हाई कभी जो पास आती,
दिल पूछता तुम संग हो न,
तुम बिन क्यों जी न पाते हम,
चाह के भी अपने दिनों को,
तुम बिन कोई ख़ुशी न भाती क्यों,
खुशियों का मेरी तुम रंग हो न,
जान गया हूँ बेहतर अब,
रूह का तेरी हर कोना,
एकतरफा नहीं है वफ़ा मेरी,
तुम्हे भी मेरा इंतज़ार है,
तभी लब कहते हैं इशारे में,
की तुम्हे भी मुझसे प्यार है!

चलो फिर किसी अजनबी से दिल लगाया जाए........

chalo fir kisi ajnabi se dil lagaya jaaye..
बहुत खुशगवार सी चल रही गई ज़िंदगी मेरी,
चलो फिर किसी अजनबी से दिल लगाया जाए,
खाली सा मन होता हर पल,
और नींद भी अच्छी आती है,
पर बेचैनियों वाली वो,
रातें भी याद आती हैं
भूख भी होती थी फिर भी,
खाया कुछ न जाता था,
नींद भी पलकों में होती,
पर जाग के रात बिताता था,
सोच रहा हु फिर से वही,
दिन को एक बार दुहराया जाए,
बहुत खुशगवार सी चल रही गई ज़िंदगी मेरी,
चलो फिर किसी अजनबी से दिल लगाया जाए,
वो बेचैनियां जो सीने में,
हर वक़्त ही उतरा करती थी,
संभल नहीं पता था दिल,
चाहे कितना भी धड़कन डरती थी,
खो देती थी खुद को हर बार,
इश्क़ की उन सूनी राहों में,
पर भूल भी जाती थी हर गम,
जब होती महबूब की बाहों में,
अब खो दिया सब कुछ फिर भी,
दिल ए नादान अब भी कहता है,
सो लिए अच्छी नींद बहुत,
अब खुद को थोड़ा सताया जाए,
बहुत खुशगवार सी चल रही गई ज़िंदगी मेरी,
चलो फिर किसी अजनबी से दिल लगाया जाए!

ख्वाबों से कभी बाहर आ के, अपना लो मुझे ना बिन बोले......

khwabon se kabhi bahar aa ke,apna lo mujhe na bin bole..
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले,
सपनो में अब जो आती हो,
रहती हो मुझसे दूरी में,
बताती भी ना हो खुल के,
उलझी हो किस मजबूरी में,
कह भी दो हालात अपने या,
भुला दो तुम अपनी उलझन,
सुना दो कभी तुम छुप कर हीं,
पायल की अपनी रुनझुन.
सुन लो इक बार ही दिल की तुम,
भाव मन के बिन तोले,
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले,
सपनो से कभी बहार तू आ,
देख यहाँ क्या चल रहा,
रंग वही हैं चाहत के या,
क्या कुछ है यहाँ बदल रहा,
पूछ ज़रा तू दिल से अपने,
खुश है वो कितना मुझ बिन,
या मिल गया कोई मुझ सा दूजा,
जो लूटा दे हंस के अपने दिन,
मिल गई चाहत अगर मुझसे बेहतर,
तो खुश रहो अपने आज में तुम,
या अब भी मेरी जरूरत है तो,
बुला लो इक आवाज़ में तुम,
फिर करीब आ के रंग वफ़ा के,
साथ मिल के दुनिया में घोलें,
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले!

आना चाहो तो आ जाओ, मैं भूल चूका हर बात पुरानी.......

aana chaho to aa jaao,main bhool chuka har baat purani..
आना चाहो तो आ जाओ,
मैं भूल चूका हर बात पुरानी,
भूल गया हर बात तुम्हारी,
क्या कुछ था तुमने मुझसे कहा,
शिकवे भी अब दिल में नहीं,
बस प्यार नहीं तुझसे अब रहा,
रिस्ता जो कुछ भी था तुझसे,
उसके हर निशान मिटा चूका,
भुला दिया वो आंसू भी,
जो तुझसे बिछड़ के था बहा,
भूल जाओ अब तुम भी सब,
ना रखो कोई दिल में हैरानी,
आना चाहो तो आ जाओ,
मैं भूल चूका हर बात पुरानी,
अब ना दिल ये मंदिर है,
ना उसमे कोई मूरत है,
ना कोई आया फिर इसमें,
ना तेरी अब भी सूरत है,
अगर है कुछ तो एक बात अधूरी,
जो तेरे लबों से सुननी है,
कह दो कि वो प्यार नहीं था,
थी वो दिल की बस नादानी,
आना चाहो तो आ जाओ,
मैं भूल चूका हर बात पुरानी!

थामा जो मेरा हाथ है, निभाने का भी वादा कर.......

thama jo mera hath hai,nibhane ka bhi vaada kar....
थामा जो मेरा हाथ है,
निभाने का भी वादा कर,
गम की पुराणी रातें या,
खुशियों के वो मेले सही,
दुनिया के किसी भी मोड़ पे,
याद रखना अब तुम अकेले नहीं,
जुड़ गई हूँ तेरे हर पल से,
ले कर तुझ संग मैं 7 फेरे,
अब तो साथ रहूंगी हर पल,
साया बन कर करीब तेरे,
तू भी हर डगर में मेरे,
संग चलने का इरादा कर,
थामा जो मेरा हाथ है,
निभाने का भी वादा कर,
मेरी फ़िक्रों में यूँही,
तू खुद को न सताया कर,
जानते हो तुम बिन रह नहीं पाती,
फिर मुझको न आज़माया कर,
मैं तो खुश हु तुझे पा कर ही,
संग मेरे तू भी खुश रहा कर,
बातें जो तुझे कोई सताए,
बेशक मुझसे तू कहा कर,
साँसों को अपनी संभल और,
परवाह न मेरी ज़्यदा कर,
थामा जो मेरा हाथ है,
निभाने का भी वादा कर!

चलो कोई दिन ही बता दो, जो खास था ज़िंदगी में तुम्हारे.......

chalo koi din hi bata do,jo khas tha zindagi me tumhare..
चलो कोई दिन ही बता दो,
जो खास था ज़िंदगी में तुम्हारे,
चाहे मत बता तू हाल अपना,
न सुना अपनी मजबूरी,
इतने दिन बाद तो मिले हैं,
क्या यही रह गया कहने को जरूरी,
चल मान लिया कुछ था नहीं,
तेरे उन पुराने वादों में,
पर वक़्त इतना साथ बीतये थे,
कुछ तो होगा तेरी यादों में,
वो किस्सा ही अपना सुना दो कोई,
जो ज़ेहन में हो अब भी तुम्हारे,
चलो कोई दिन ही बता दो,
जो खास था ज़िंदगी में तुम्हारे,
कोई दिन ऐसा जिसमे यूँ लगा हो,
पूरे जहां की खुशियां पा ली तुमने,
या कोई दिन ऐसा जिसमे,
मुझ पे हर ख़ुशी लुटाई तुमने,
कोई पल ही वो बता दो जिसमे,
बेमतलब तुम्हे रुलाया हो,
या कोई दिन ऐसा जिसमे,
जी भड़ के तुम्हे हंसाया हो,
या रह गई हो जो अधूरी दिल की,
जानू तो सही वो ख्वाइश तुम्हारे,
चलो कोई दिन ही बता दो,
जो खास था ज़िंदगी में तुम्हारे!

आज एक पुराना ख्वाब मिल गया , आँखों की आलमारी से..........

aaj fir purana khwab mil gaya,aankhon ke aalmari se..
उम्र ये आधी बीता दी हमने,
गिर के यूँ ही संभलने में,
तब भी डरते हैं अब भी,
तनहा राहों में चलने में,
कभी अपनों में तो कभी,
अकेला भी दिल ये डरता है,
सोच सोच के बात पुरानी,
खुद से कई बार ये लड़ता है,
फिर भी मन को संभल कर,
धड़कनो को बहला कर,
बस थोड़ा सा सुस्ताये ही थे,
बच के इस दुनियादारी से,
तभी एक पुराना ख्वाब मिल गया ,
आँखों की आलमारी से,
कभी संवर लिया अपनों में तो,
कभी अपनों को संभाला भी,
कभी कह दिया दुनिया से कुछ तो,
कभी ज़ुबान पर रहा ताला भी,
कभी अपने बन बैठे गैर,
कभी गैरों में ढूढ़ा अपनों को,
कभी हँस के जी लिया ख्वाब तो,
कभी टूटते देखा सपनो को,
सोचा जब पाया ही क्या,
धड़कनों की वफादारी से,
तभी एक पुराना ख्वाब मिल गया ,
आँखों की आलमारी से!

तुम्हे भी प्यार है मुझसे, कह दो न ये इक बारी........

tumhe bhi pyar hai mujhse,keh do na ye ik baari..
तुम्हे भी प्यार है मुझसे,
कह दो न ये इक बारी,
क्यों पास तुम्हे न देख कर,
धड़कन खुद में रूकती है,
क्यों आँखें अब भी मेरी,
तेरे सजदे में ही झुकती है,
क्यों तेरी फ़िक्रों में अब भी,
दिल वक़्त जाया करता है,
क्यों तेरे पीछे दुनिया को,
दिल ये पराया कहता है,
तुम क्या जानो धड़कन ही क्या,
साँसें तक है तुमपे हारी,
तुम्हे भी प्यार है मुझसे,
कह दो न ये इक बारी,
ज़िंदगी तुम्हारे साथ कटे,
अधूरा सा एक ख्वाब है,
अगर तुम नहीं तो खुशियों से,
रूठा स एक हिसाब है,
खामोशियाँ कभी अपनी तोड़ो,
कह भी दो कुछ ज़ुबान से अपनी,
मन में है जो भी तुम्हारे,
दिल सुनने को बेताब है,
जाने की चाह है इतनी ही,
क्या कहती है धड़कन तुम्हारी,
तुम्हे भी प्यार है मुझसे,
कह दो न ये इक बारी,
सिर्फ हक़ीक़त से ही नहीं,
तेरे ख्वाबों से भी मेरा वास्ता है,
रब दीखता तुजमे मुझको,
इक अजीब सी मेरी आस्था है,
चलने को तैयार नहीं,
इक पल भी कदम मेरे तुम बिन,
तू अगर साथ नहीं मेरे,
सूना दीखता हर रास्ता है,
अब तो बस तेरा हाथ थम कर,
जीने की है ख्वाइश हमारी,
तुम्हे भी प्यार है मुझसे,
कह दो न ये इक बारी!

आओ साथ मिल कर नया, सुनहरा कल हम लिखते हैं........

aao sath mil kar naya,sunahra kal hum likhte hain..
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं,
एक दूजे में ही खोये खोये,
पल ये बीता लिए बहुत,
साथ जीने मरने के,
सपने भी सजा लिए बहुत,
अब ख्वाब वही बस जिनमे की,
हम हमेशा संग में थे,
हर ख़ुशी हर गम में,
जीने के अपने ढंग में थे,
उन्ही ख्वाबों की दुनिया में,
हम साथ कदम अब रखते हैं,
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं,
बनाते हैं दुनिया ऐसी,
जिसमे बस अपनी खुशियां हो,
न ही कोई गीला हो दिल में,
न मन में कोई शिकवा हो,
बिन कहे समझ लें गम दिल के,
एक दूजे को जाने हम ऐसे,
जैसे धरती की प्यास को,
बदल समझ लेता है कैसे,
तराशें हम राहें अपनी,
खुद चाहत के रंगों से,
चलो चले हम उनसे अलग,
जो उम्मीदें बस तकते हैं,
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं!

आओ २ पल की फुरसत में, कहीं दूर साथ में चलते हैं...........

aao do pal ki fursat me,kahin door sath me chalte hain..
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
खुशियों की सुबहें हो जहाँ,
और गम की न हो कोई वजह,
अगर साथ तुम आ जो तो,
ले चले तुम्हे ऐसी जगह,
रातें न हो खामोश जिधर,
जहाँ दिन भी हॅंस के ढलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
कभी साथ बैठ कर देखे थे,
अनचाहे डगर की जो राहें,
समेटते थे जिन यादों को,
फैला के अपनी दोनों बाहें,
वक़्त मिले तो आओ कभी,
उन खव्बों को सच करते हैं,
सपनो में देखे थे जो,
उस मंज़िल पे निकलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं!

एक और थप्पड़ वो प्यार का, फिर से मुझको मारो माँ....

ek aur thappad aur pyar ka,fir se mujhko maaro maa..
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
उदासी तुझपे जंचती नहीं,
अब तो ज़ुबान को खोल दो,
माँ तुझको है कसम मेरी,
जो दिल में है वो बोल दो,
अगर गुस्सा है किसी बात का तो,
बेशक मुझपे उतारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
याद है मुझको हर वो पल,
जब मैं रातों को रोता था,
तू साथ में मेरे जगती थी,
जब तक की मैं न सोता था,
तब नहीं समझ था पर,
अब ये बात जानता हूँ,
बहूत सताया माँ तुझको,
गलती मैं अपनी मानता हूँ,
थी समझ नही किसी बात की तब,
ये सोच के ही बस माफ़ कर दे,
फिंकी लगती तुझ बिन दुनिया,
आ कर थोड़ा दुलारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ!

कोई तो मुझे बताये ज़रा, क्या प्यार इसे ही कहते हैं..........

koi to mujhe bataye zara,kya pyar ise hi kehte hain..
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं,
जब ख़ुशी आये चेहरे पे,
सोच किसी की बात को,
छुप न पाए हसरतें दिल की,
पाकर किसी के साथ को,
यादें जब मक़सद बने जीने का,
और नींद नहीं आये रात को,
जब दूरियों में हो कर भी,
कोई दिल में हर पल रहते हैं,
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं,
जब दिल में खुद के खुशियों की,
कदर न उतनी रहती है,
बस सुनाई देता उतना ही,
दिल की धड़कन जो कहती है,
जब सूरत कोई आँखों में,
इस कदर बस जाता है,
की दूर एक पल भी होने पर,
उलझन में दिल पड़ जाता है,
हस्ते हैं फर वो दुनिया के आगे,
और दर्द छुपा के सहते हैं,
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं!

ऐ काश की कुछ ऐसा हो.......

ay kaash ki kuch aisa ho..
चाहा कभी भी मैंने जो,
न माँगा खुद से मैंने वो,
खुद पर हर बार भरोसा किया,
हर फैसला अपना खुद ही लिया,
पर थक गया जो चलते चलते,
फिर खुद से मांग लिया,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो,
अपनों के हर पल साथ हो,
गम की न कोई बात हो,
सोचता हूँ ख्वाबों में जो,
वैसा ही हर दिन रात हो,
जीतू बाज़ी ज़िन्दगी की सारी,
फिर कहीं न मेरी मात हो,
खुशियों के रस्ते से नयी,
इक ज़िन्दगी की शुरुआत हो,
सजाया है जो मन ही मन में,
हर रंग ही वफ़ा का वैसा हो,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो!

मेरे ख्वाईशो के पन्नो से, ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो.......

mere khwaishon ke panno se,ay zindagi kabhi gujar ke dekho..
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो,
जो गुजरे तुम धड़कन से मेरी,
सुकून दिल का खो जायेगा,
कैसे मैं रहता हूँ खुद में,
एहसास तुम्हे हो जायेगा,
की ख्वाबों को मन में दबा,
ख्वाइशों को मार कर,
हँसता हूँ फिर भी कैसे,
मालूम तुम्हे हो जायेगा,
फिर भी लगूँ अनजान अगर,
या मुझको न जान पाओ,
तो गम में मेरे करीब और,
खुशियों में मेरी संवर के देखो,
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो,
क्यूँ तू मेरे ख्वाबों को,
मनचाहा मोर न देती है,
क्यूँ तू बीच राहों में,
मुझे ला के चोर देती है,
बचत फिरता हूँ हर पल में,
दुनिया के जिन झमेलों से,
और हर पल में एक नयी उलझन,
दमन में थमा तू देती है,
जी कर देखो कभी मुझमे तुम,
फिर जान सकोगे मुझको बेहतर,
या मन के मेरे उलझनों में,
कभी तुम भी उलझ के देखो,
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो!

तलाश मुझे उस नज़र की है, जिस नज़र में मेरी कदर रहे.............

talash mujhe us nazar ki hai,jis nazar mein meri kadar rahe..
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे,
थक गया हूँ भाग भाग के,
खूबसूरत चेहरों के पीछे,
थक गया हूँ चल के दिल की राह,
पलकों को कर के नीचे,
अब ख्वाइश नहीं कुछ ज़्यादा बस,
अपनेपन का एहसास मिले,
दिखने में चाहे साधारण हो,
मन में न रखे कोई गीले,
कहुँ न कुछ उससे फिर भी,
उसको मेरी हर खबर रहे,
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे,
नहीं चाहिए कोई ऐसा,
जो उलझ हो खुद में हर पल,
न चाहिए कोई ऐसा भी,
मन में हो जिसके कोई छल,
चाहत है तो बस इतनी ही,
कदम जो मेरे रुक जाये कभी,
थामे वो हाथ मेरा और कहे,
मैं हूँ न मेरे साथ में चल,
उदास रहूँ तो रूठे न मुझसे,
बस इतना उसमे सबर रहे,
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे!