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| ab yaadon me hi jeena tum,mulaqat ye aakhri hai.... |
मुलाक़ात ये आखरी है,
अब ख्वाबों में ही ढूँढना,
बीतये जो दिन साथ में,
न हँस पता हूँ खुद में अब,
न हँसी तेरी मेरे हाथ में,
ये फैसला है दोनों का,
खुशियाँ भले हीं बिखड़ी है,
अब यादों में ही जीना तुम,
मुलाक़ात ये आखरी है,
निकले जो भी होठों से तेरे,
हँस के तेरी हर बात वो मानी,
आज तक थी तुम हक़ीक़त मेरी,
कल होगी तुम किस्सा पुरानी,
अब क्या पता कहीं मिल ही जाएँ,
हो जगह कोई वो अनजानी,
तो कल बस इतना कह देना,
ये सूरत है जानी पहचानी,
खत्म हो रहा रिश्ता पर,
ज़िंदगी ख्वाबों से निखड़ी है,
अब यादों में ही जीना तुम,
मुलाक़ात ये आखरी है!

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