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| aao do pal ki fursat me,kahin door sath me chalte hain.. |
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
खुशियों की सुबहें हो जहाँ,
और गम की न हो कोई वजह,
अगर साथ तुम आ जो तो,
ले चले तुम्हे ऐसी जगह,
रातें न हो खामोश जिधर,
जहाँ दिन भी हॅंस के ढलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
कभी साथ बैठ कर देखे थे,
अनचाहे डगर की जो राहें,
समेटते थे जिन यादों को,
फैला के अपनी दोनों बाहें,
वक़्त मिले तो आओ कभी,
उन खव्बों को सच करते हैं,
सपनो में देखे थे जो,
उस मंज़िल पे निकलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं!









