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आओ २ पल की फुरसत में, कहीं दूर साथ में चलते हैं...........

aao do pal ki fursat me,kahin door sath me chalte hain..
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
खुशियों की सुबहें हो जहाँ,
और गम की न हो कोई वजह,
अगर साथ तुम आ जो तो,
ले चले तुम्हे ऐसी जगह,
रातें न हो खामोश जिधर,
जहाँ दिन भी हॅंस के ढलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
कभी साथ बैठ कर देखे थे,
अनचाहे डगर की जो राहें,
समेटते थे जिन यादों को,
फैला के अपनी दोनों बाहें,
वक़्त मिले तो आओ कभी,
उन खव्बों को सच करते हैं,
सपनो में देखे थे जो,
उस मंज़िल पे निकलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं!

एक और थप्पड़ वो प्यार का, फिर से मुझको मारो माँ....

ek aur thappad aur pyar ka,fir se mujhko maaro maa..
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
उदासी तुझपे जंचती नहीं,
अब तो ज़ुबान को खोल दो,
माँ तुझको है कसम मेरी,
जो दिल में है वो बोल दो,
अगर गुस्सा है किसी बात का तो,
बेशक मुझपे उतारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
याद है मुझको हर वो पल,
जब मैं रातों को रोता था,
तू साथ में मेरे जगती थी,
जब तक की मैं न सोता था,
तब नहीं समझ था पर,
अब ये बात जानता हूँ,
बहूत सताया माँ तुझको,
गलती मैं अपनी मानता हूँ,
थी समझ नही किसी बात की तब,
ये सोच के ही बस माफ़ कर दे,
फिंकी लगती तुझ बिन दुनिया,
आ कर थोड़ा दुलारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ!

कोई तो मुझे बताये ज़रा, क्या प्यार इसे ही कहते हैं..........

koi to mujhe bataye zara,kya pyar ise hi kehte hain..
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं,
जब ख़ुशी आये चेहरे पे,
सोच किसी की बात को,
छुप न पाए हसरतें दिल की,
पाकर किसी के साथ को,
यादें जब मक़सद बने जीने का,
और नींद नहीं आये रात को,
जब दूरियों में हो कर भी,
कोई दिल में हर पल रहते हैं,
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं,
जब दिल में खुद के खुशियों की,
कदर न उतनी रहती है,
बस सुनाई देता उतना ही,
दिल की धड़कन जो कहती है,
जब सूरत कोई आँखों में,
इस कदर बस जाता है,
की दूर एक पल भी होने पर,
उलझन में दिल पड़ जाता है,
हस्ते हैं फर वो दुनिया के आगे,
और दर्द छुपा के सहते हैं,
कोई तो मुझे बताये ज़रा,
क्या प्यार इसे ही कहते हैं!

ऐ काश की कुछ ऐसा हो.......

ay kaash ki kuch aisa ho..
चाहा कभी भी मैंने जो,
न माँगा खुद से मैंने वो,
खुद पर हर बार भरोसा किया,
हर फैसला अपना खुद ही लिया,
पर थक गया जो चलते चलते,
फिर खुद से मांग लिया,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो,
अपनों के हर पल साथ हो,
गम की न कोई बात हो,
सोचता हूँ ख्वाबों में जो,
वैसा ही हर दिन रात हो,
जीतू बाज़ी ज़िन्दगी की सारी,
फिर कहीं न मेरी मात हो,
खुशियों के रस्ते से नयी,
इक ज़िन्दगी की शुरुआत हो,
सजाया है जो मन ही मन में,
हर रंग ही वफ़ा का वैसा हो,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो!

मेरे ख्वाईशो के पन्नो से, ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो.......

mere khwaishon ke panno se,ay zindagi kabhi gujar ke dekho..
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो,
जो गुजरे तुम धड़कन से मेरी,
सुकून दिल का खो जायेगा,
कैसे मैं रहता हूँ खुद में,
एहसास तुम्हे हो जायेगा,
की ख्वाबों को मन में दबा,
ख्वाइशों को मार कर,
हँसता हूँ फिर भी कैसे,
मालूम तुम्हे हो जायेगा,
फिर भी लगूँ अनजान अगर,
या मुझको न जान पाओ,
तो गम में मेरे करीब और,
खुशियों में मेरी संवर के देखो,
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो,
क्यूँ तू मेरे ख्वाबों को,
मनचाहा मोर न देती है,
क्यूँ तू बीच राहों में,
मुझे ला के चोर देती है,
बचत फिरता हूँ हर पल में,
दुनिया के जिन झमेलों से,
और हर पल में एक नयी उलझन,
दमन में थमा तू देती है,
जी कर देखो कभी मुझमे तुम,
फिर जान सकोगे मुझको बेहतर,
या मन के मेरे उलझनों में,
कभी तुम भी उलझ के देखो,
मेरे ख्वाईशो के पन्नो से,
ऐ ज़िन्दगी कभी गुजर कर देखो!

तलाश मुझे उस नज़र की है, जिस नज़र में मेरी कदर रहे.............

talash mujhe us nazar ki hai,jis nazar mein meri kadar rahe..
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे,
थक गया हूँ भाग भाग के,
खूबसूरत चेहरों के पीछे,
थक गया हूँ चल के दिल की राह,
पलकों को कर के नीचे,
अब ख्वाइश नहीं कुछ ज़्यादा बस,
अपनेपन का एहसास मिले,
दिखने में चाहे साधारण हो,
मन में न रखे कोई गीले,
कहुँ न कुछ उससे फिर भी,
उसको मेरी हर खबर रहे,
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे,
नहीं चाहिए कोई ऐसा,
जो उलझ हो खुद में हर पल,
न चाहिए कोई ऐसा भी,
मन में हो जिसके कोई छल,
चाहत है तो बस इतनी ही,
कदम जो मेरे रुक जाये कभी,
थामे वो हाथ मेरा और कहे,
मैं हूँ न मेरे साथ में चल,
उदास रहूँ तो रूठे न मुझसे,
बस इतना उसमे सबर रहे,
तलाश मुझे उस नज़र की है,
जिस नज़र में मेरी कदर रहे!

मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और, उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए.............

main atrangi satrangi sa mann ka aur,use har kyun ka jawab chahiye..









मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए,
कोई है खास मेरे दिल के पास,
जो करीब ही मेरे रहती है,
पर समझती न ख़ामोशी वो,
न खुद ही कुछ कहती है,
मैं कह दू कभी देखो मौसम,
लग रहा है यूँ कितना है सुहाना,
पर वो पूछ देती फिर ये,
कहो पहले तुमने कैसे जाना,
मैं बेवजह भी ख्वाब देखूं पर,
उसे सच्चा ही हर ख्वाब चाहिए,
मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए,
कभी कभी तो सोचता हूँ,
पकड़ लूँ उसका हाथ और,
आसान से शब्दों में उससे,
कह दूँ दिल की बात को,
की साथ अब बस तुम्हारा ही,
मुझको मेरे हर पल में चाहिए,
आज में चाहिए तू मुझे,
तू ही मुझे मेरे कल में चाहिए,
फिर सोचता हूँ कहुँगा क्या,
अगर पूछ दिए वो क्यूँ चाहिए,
मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए!

इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा, मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ..........

itni si to bas khwaish hai papa,main tumhe naam apna de sakun..
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ,
अब तक जो भी सिख यहाँ,
सब तेरा ही तो है सिखाया,
तेरे ही कर्मों का फल है,
जो जहाँ से इतना प्यार है पाया,
अब कोशिश हर बार यही है अच्छे,
बेटे का फ़र्ज़ पूरा कर सकूँ,
जो संस्कार सीखे हैं तुमसे,
उन पर मैं खड़ा उत्तर सकूँ,
जाने सब तुम्हे काम से मेरे,
ऐसी पहचान तुम्हे मैं दे सकूँ,
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ,
हार भी जाने पर मेरे,
मुझसे हर बार उम्मीद करना,
अपने कामों में हो कर भी,
मेरे ज़िद्द का हर पल ध्यान रखना,
गुस्सा होना मेरी गलती पे,
ख़ामोशी में मेरे पास होना,
जो पसंद नहीं आया तुम्हे कभी,
वो था मेरा बेमतलब रोना,
बस एक तेरी मेहनत से मुझे जो मिला,
वही ठाठ वही आराम तुम्हे मैं दे सकूँ,
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ!

फ़िलहाल बस इतना बता दो, बच्चों का क्या नाम रखेंगे..........

bachhon ka kya naam rakhenge..
रिश्तों की नयी शुरुआत में,
जब हम तुम होंगे साथ में,
तुम ही तुम दिखोगे हर पल,
मेरे हर दिन रात में,
फिर तुम बता दो ख्वाबों से,
कैसे भला दूरी होगी,
चेहरे पे उदासी दिख जाए,
ऐसी भी क्या मज़बूरी होगी,
फिर तो अधूरे ख्वाबों के,
पूरे मेरे पैगाम दिखेंगे,
फ़िलहाल बस इतना बता दो,
बच्चों का क्या नाम रखेंगे,
साथ होगी जब तू हक़ीक़त में,
फिर ख्वाबों में क्यूँ रात होगी,
तब तो सूनी हर धड़कन से,
बस एक तेरी ही बात होगी,
फिर गम में तुझे हँसाना और,
तेरी खुशियों में जीना सीखेंगे,
फ़िलहाल बस इतना बता दो,
बच्चों का क्या नाम रखेंगे,
सोचते रहते हैं एक तुझे और,
खुद में खोये रहते हैं,
तुम्हे ही याद करने के बहाने,
झूठी नींद में सोये रहते हैं,
कभी गम तो कभी ख़ुशी के,
जो भी पल यादों में दीखते हैं,
हर रोज ही अपने शब्दों में,
उन बातों को हम लिखते हैं,
आज लिखते हैं बीते पल तो कल,
नयी ज़िन्दगी की शुरुआत लिखेंगे,
फ़िलहाल बस इतना बता दो,
बच्चों का क्या नाम रखेंगे!

मेरी बातों पे यूँ हँसा न कर, वरना प्यार हो जायेगा...........

meri baaton pe yu hasa na kar,warna pyar ho jyega..
मेरी बातों पे यूँ हँसा न कर,
वरना प्यार हो जायेगा,
बस सुन के दिल से निकल दो,
सोचा न करो मेरी बातों को,
सपनो के ही मजे लो,
खामोश न करो रातों को,
क्यूँ चैन छीन इस दिल का,
इसको बेचैन तुम करोगी,
अच्छी खासी हो दूर भला,
फिर प्यार में क्यूँ तुम पड़ोगी,
आज अकेली जी लेती हो,
कल जीना मुश्किल हो जायेगा,
मेरी बातों पे यूँ हँसा न कर,
वरना प्यार हो जायेगा,
दुनिया में इस झमेले से,
बढ़ कर कोई सितम नही होती,
ये प्यार मुहब्बत की बातें,
कितना भी कर लो खत्म नहीं होती,
हर वक़्त ही उलझी पाओगी,
खुद को बेकार की बातों में,
जागोगी फिर मुझे याद कर के,
अक्सर तुम तनहा रातों में,
आज उठती हो जबरदस्ती सुबह,
कल सोना मुश्किल हो जायेगा,
मेरी बातों पे यूँ हँसा न कर,
वरना प्यार हो जायेगा!