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आओ २ पल की फुरसत में, कहीं दूर साथ में चलते हैं...........

aao do pal ki fursat me,kahin door sath me chalte hain..
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
खुशियों की सुबहें हो जहाँ,
और गम की न हो कोई वजह,
अगर साथ तुम आ जो तो,
ले चले तुम्हे ऐसी जगह,
रातें न हो खामोश जिधर,
जहाँ दिन भी हॅंस के ढलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं,
कभी साथ बैठ कर देखे थे,
अनचाहे डगर की जो राहें,
समेटते थे जिन यादों को,
फैला के अपनी दोनों बाहें,
वक़्त मिले तो आओ कभी,
उन खव्बों को सच करते हैं,
सपनो में देखे थे जो,
उस मंज़िल पे निकलते हैं,
आओ २ पल की फुरसत में,
कहीं दूर साथ में चलते हैं!

7 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

ati utam kavita

Unknown ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Unknown ने कहा…

Bas duaaen aapki..

Vivek Sharma ने कहा…

Very beautiful poem ji.

Unknown ने कहा…

Nicee..I love to go wid someone

Unknown ने कहा…

Then what r u waiting for..go for a long way..

Unknown ने कहा…

Thanks