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आओ साथ मिल कर नया, सुनहरा कल हम लिखते हैं........

aao sath mil kar naya,sunahra kal hum likhte hain..
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं,
एक दूजे में ही खोये खोये,
पल ये बीता लिए बहुत,
साथ जीने मरने के,
सपने भी सजा लिए बहुत,
अब ख्वाब वही बस जिनमे की,
हम हमेशा संग में थे,
हर ख़ुशी हर गम में,
जीने के अपने ढंग में थे,
उन्ही ख्वाबों की दुनिया में,
हम साथ कदम अब रखते हैं,
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं,
बनाते हैं दुनिया ऐसी,
जिसमे बस अपनी खुशियां हो,
न ही कोई गीला हो दिल में,
न मन में कोई शिकवा हो,
बिन कहे समझ लें गम दिल के,
एक दूजे को जाने हम ऐसे,
जैसे धरती की प्यास को,
बदल समझ लेता है कैसे,
तराशें हम राहें अपनी,
खुद चाहत के रंगों से,
चलो चले हम उनसे अलग,
जो उम्मीदें बस तकते हैं,
आओ साथ मिल कर नया,
सुनहरा कल हम लिखते हैं,
कुछ तुम भी अपना बात रखो,
कुछ हम भी अपनी रखते हैं!

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