ads

ख्वाबों से कभी बाहर आ के, अपना लो मुझे ना बिन बोले......

khwabon se kabhi bahar aa ke,apna lo mujhe na bin bole..
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले,
सपनो में अब जो आती हो,
रहती हो मुझसे दूरी में,
बताती भी ना हो खुल के,
उलझी हो किस मजबूरी में,
कह भी दो हालात अपने या,
भुला दो तुम अपनी उलझन,
सुना दो कभी तुम छुप कर हीं,
पायल की अपनी रुनझुन.
सुन लो इक बार ही दिल की तुम,
भाव मन के बिन तोले,
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले,
सपनो से कभी बहार तू आ,
देख यहाँ क्या चल रहा,
रंग वही हैं चाहत के या,
क्या कुछ है यहाँ बदल रहा,
पूछ ज़रा तू दिल से अपने,
खुश है वो कितना मुझ बिन,
या मिल गया कोई मुझ सा दूजा,
जो लूटा दे हंस के अपने दिन,
मिल गई चाहत अगर मुझसे बेहतर,
तो खुश रहो अपने आज में तुम,
या अब भी मेरी जरूरत है तो,
बुला लो इक आवाज़ में तुम,
फिर करीब आ के रंग वफ़ा के,
साथ मिल के दुनिया में घोलें,
ख्वाबों से कभी बाहर  आ के,
अपना लो मुझे ना बिन बोले!

कोई टिप्पणी नहीं: