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मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और, उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए.............

main atrangi satrangi sa mann ka aur,use har kyun ka jawab chahiye..









मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए,
कोई है खास मेरे दिल के पास,
जो करीब ही मेरे रहती है,
पर समझती न ख़ामोशी वो,
न खुद ही कुछ कहती है,
मैं कह दू कभी देखो मौसम,
लग रहा है यूँ कितना है सुहाना,
पर वो पूछ देती फिर ये,
कहो पहले तुमने कैसे जाना,
मैं बेवजह भी ख्वाब देखूं पर,
उसे सच्चा ही हर ख्वाब चाहिए,
मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए,
कभी कभी तो सोचता हूँ,
पकड़ लूँ उसका हाथ और,
आसान से शब्दों में उससे,
कह दूँ दिल की बात को,
की साथ अब बस तुम्हारा ही,
मुझको मेरे हर पल में चाहिए,
आज में चाहिए तू मुझे,
तू ही मुझे मेरे कल में चाहिए,
फिर सोचता हूँ कहुँगा क्या,
अगर पूछ दिए वो क्यूँ चाहिए,
मैं अतरंगी सतरंगी सा मन का और,
उसे हर क्यूँ का जवाब चाहिए!

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