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एक और थप्पड़ वो प्यार का, फिर से मुझको मारो माँ....

ek aur thappad aur pyar ka,fir se mujhko maaro maa..
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
उदासी तुझपे जंचती नहीं,
अब तो ज़ुबान को खोल दो,
माँ तुझको है कसम मेरी,
जो दिल में है वो बोल दो,
अगर गुस्सा है किसी बात का तो,
बेशक मुझपे उतारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ,
याद है मुझको हर वो पल,
जब मैं रातों को रोता था,
तू साथ में मेरे जगती थी,
जब तक की मैं न सोता था,
तब नहीं समझ था पर,
अब ये बात जानता हूँ,
बहूत सताया माँ तुझको,
गलती मैं अपनी मानता हूँ,
थी समझ नही किसी बात की तब,
ये सोच के ही बस माफ़ कर दे,
फिंकी लगती तुझ बिन दुनिया,
आ कर थोड़ा दुलारो माँ,
एक और थप्पड़ वो प्यार का,
फिर से मुझको मारो माँ!

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

bahut sunder .....