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| ay kaash ki kuch aisa ho.. |
न माँगा खुद से मैंने वो,
खुद पर हर बार भरोसा किया,
हर फैसला अपना खुद ही लिया,
पर थक गया जो चलते चलते,
फिर खुद से मांग लिया,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो,
अपनों के हर पल साथ हो,
गम की न कोई बात हो,
सोचता हूँ ख्वाबों में जो,
वैसा ही हर दिन रात हो,
जीतू बाज़ी ज़िन्दगी की सारी,
फिर कहीं न मेरी मात हो,
खुशियों के रस्ते से नयी,
इक ज़िन्दगी की शुरुआत हो,
सजाया है जो मन ही मन में,
हर रंग ही वफ़ा का वैसा हो,
दुनिया हकीकत की भी,
मेरे सपनो के जैसा हो,
सच हो जाये मेरे वो दुनिया ख्वाब सारे,
ऐ काश की कुछ ऐसा हो!

3 टिप्पणियां:
nice
Nice....kash aisa ho
Just believe in god..
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