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| na jaane mere khwabon ki,ab ye sazish kaisi hai.. |
अब ये साज़िश है,
अजीब से कुछ ख्यालों में,
खोया हुआ रहता है ये दिल,
उलझ रहा है मन को भी,
दिखा के कई नयी मंज़िल,
बदलते सपनो के इस भवर में,
लगता है खो जाने का डर,
कमज़ोर होते दिख रहे,
मेरे ये विश्वास के पर,
ऐसा लगता है दिल मेरा,
अब मेरे ही खिलाफ है,
चाहत है क्या इसकी मुझसे,
मकसद न कुछ भी साफ़ है,
खुद को ही खो देने की,
खुद से ये रंजिश कैसी है,
न जाने मेरे ख्वाबों की,
अब ये साज़िश कैसी है!

4 टिप्पणियां:
Nice lines. ...I love it...
Nice lines. ...I love it...
Amazing lines my friend ...
Thanks bhai
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