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मंज़िल की तलाश में हूँ, दिल्ली की तंग गलियों में.....

manzil ki talash me hu,dilli ki tang galiyon me..
मंज़िल की तलाश में हूँ,
दिल्ली की तंग गलियों में,
हर रोज नयी उम्मीद ले के,
सुबहें ये रोज आती है,
रास्ता मेरी मंज़िल का,
मेरी ज़िन्दगी मुझे बताती है,
चल कर उन राहों पर ही,
मैं मंज़िल अपनी धुंध रहा,
फूल धुंध रहा खुशियों के,
ख्वाबों की खिलती कलियों में,
मंज़िल की तलाश में हूँ,
दिल्ली की तंग गलियों में,
ख्वाइशों को मनन में लिए,
खुद से थोड़ा मगरूर हूँ,
यादों में ही जीत हूँ,
घर से भी काफी दूर हूँ,
दूरियों के एहसास में ही,
दिल में लिए रिश्तों को अपने,
जी रहा हूँ हर पल को,
करने को पूरे कुछ सपने,
अपने खुशियों की चाह में या,
वक़्त की रंग रलियों में,
मंज़िल की तलाश में हूँ,
दिल्ली की तंग गलियों में!

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