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मिलेगी मंज़िल मेरे भी दिल की, बस थोड़ा सा इंतज़ार और...........

milegi manzil mere bhi dil ki,bas thoda sa intzar aur..
ज़िन्दगी हर पल राहों में है,
न जाने चल दे कब किस ओर,
ये है अपने मर्ज़ी की मालिक,
न है इसपे कोई मेरा ज़ोर,
बस चल रहे हैं आस में,
मंज़िल की अपनी तलाश में,
इन राहों के हर पड़ाव पर,
करते हुए हर बातों पे गौर,
मिलेगी मंज़िल मेरे भी दिल की,
बस थोड़ा सा इंतज़ार और,
कभी अकेले तो कभी साथ में,
कभी रास्तों को हम निहारते,
कभी टूट जाते हम खुद ही,
तो कहीं रिश्तों को हम सँभालते,
कच्चे पक्के इन रास्तों पर,
जारी है ज़िन्दगी की भाग दौड़,
मिलेगी मंज़िल मेरे भी दिल की,
बस थोड़ा सा इंतज़ार और!