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| itni si to bas khwaish hai papa,main tumhe naam apna de sakun.. |
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ,
अब तक जो भी सिख यहाँ,
सब तेरा ही तो है सिखाया,
तेरे ही कर्मों का फल है,
जो जहाँ से इतना प्यार है पाया,
अब कोशिश हर बार यही है अच्छे,
बेटे का फ़र्ज़ पूरा कर सकूँ,
जो संस्कार सीखे हैं तुमसे,
उन पर मैं खड़ा उत्तर सकूँ,
जाने सब तुम्हे काम से मेरे,
ऐसी पहचान तुम्हे मैं दे सकूँ,
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ,
हार भी जाने पर मेरे,
मुझसे हर बार उम्मीद करना,
अपने कामों में हो कर भी,
मेरे ज़िद्द का हर पल ध्यान रखना,
गुस्सा होना मेरी गलती पे,
ख़ामोशी में मेरे पास होना,
जो पसंद नहीं आया तुम्हे कभी,
वो था मेरा बेमतलब रोना,
बस एक तेरी मेहनत से मुझे जो मिला,
वही ठाठ वही आराम तुम्हे मैं दे सकूँ,
इतनी सी तो बस ख्वाइश है पापा,
मैं तुम्हे नाम अपना दे सकूँ!

4 टिप्पणियां:
nice poem pankaj ji
Ohho..itni izzat vineeta ji..dhanyavad apka
i always respect u ji ;P
Thank u ji..
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