हालात चाहे कैसे भी रहे,
हँसी हर वक़्त देखी चेहरे पे आपके,
मुझे ना हमेशा से हीं आप जैसा बनना था,
ना काम ना ज़्यादा, बिलकुल नाप के,
कद काठी थोड़ी अलग भी हो,
मुझे आप सा ह्रदय हीं चाहिए था,
मुझे आप सी बोली चाहिए थी,
मुझे आप सा व्यवहार चाहिए था,
आज अगर जो मैं थोड़ा भी कुछ हुँ,
थोड़ी भी अलग जो मेरी पहचान है,
तो ये एक अकेली मेहनत मेरी नहीं,
ये आपके भी संघर्षों का परिणाम है,
सब आपसे हीं तो पाया है,
ये बोल चाल, ये व्यवहार,
ये तौर तरीके जीवन के,
अब आपकी खुशियों के खातिर,
मेरी भी कोशिश तमाम है,
आपसे कभी कहा नहीं खुल के,
कुछ बातें जो आपसे कहनी बहुत ज़रूरी थीं,
अब वक्त बीत रहा है तो,
याद सब कुछ आता है,
मेरा तो आपको पता है ना,
मेरे से कहाँ कुछ भुला जाता है।
यूँ तो खुद की दुनिया
बसा ली है इस शहर में फिर भी,
गाँव में अपने,
मैं आपसे पहचाना जाता हुँ,
मुझे गर्व होता है सुन के,
जब भी मैं आपके नाम से जाना जाता हुँ,
हमेशा ज़रूरत से ज़्यादा ही सब कुछ दिया,
कहाँ आप 'ना' कभी हमसे कहते थे,
करके पूरे शौक हमारे,
कितने सादे आप रहते थे,
बात हमेशा उतनी ही नहीं होती थी,
जितनी आप हमसे कहते थे,
मैंने सीखा है आपसे पापा,
कि जब वक्त बुरा हो तो,
धैर्य कैसे खुद में रखते थे,
मैंने सीखा है आपसे ठहराव,
मुश्किल होती राहों में,
मैंने सीखा है आपसे कि,
शौक मन में कैसे दब जाते हैं,
मैंने सीखा है आपसे कि,
ज़िम्मेदारी कैसे निभाई जाती है,
मैंने सीखा है आपसे,
रिश्ते कैसे बचाए जाते हैं,
एक ख्वाब मैं जिसके पिछे हुँ,
एक तमन्ना जो अभी भी है अधूरी,
कि करूँ हासिल कोई मुकाम ऐसा,
फिर गले लगूँ आपके,
करके मैं अपनी छाती चौड़ी,
भर जाए तो, भर जाए चाहे,
आँखें उस पल हम दोनों की,
ओह! माँ भी तो साथ खड़ी होगी,
फिर मैं बात कर रहा हम तीनों की,
कल लोग आपको मेरे नाम से जानें,
मुझे उस मुकाम तक जाना है,
जिनमें बसती हों खुशियाँ आपकी,
मुझे हर वो ख्वाब सजाना है,
आपने अपने किरदार को,
बखूबी है निभाया पापा,
मुझे भी तो अब आखिर में,
अपना फर्ज़ निभाना है!
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